आठवां नवरात्र (अष्टमी) 26/03/2026 – माँ महागौरी का महत्व और पूजा विधि
माँ महागौरी का स्वरूप
आठवें नवरात्रि के दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है। इनका रंग अत्यंत गौर (सफेद) होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है। ये शांति, पवित्रता और करुणा की प्रतीक हैं।
अष्टमी का महत्व
-
- इस दिन को दुर्गाष्टमी भी कहा जाता है।
-
- मान्यता है कि माँ महागौरी की पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
-
- जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
-
- कुंवारी कन्याओं (कन्या पूजन) का विशेष महत्व होता है।
पूजा विधि (Step-by-Step)
-
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
-
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
-
- माँ महागौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
-
- उन्हें सफेद फूल, चावल, रोली, कुमकुम अर्पित करें।
-
- नारियल और फल का भोग लगाएं।
-
- माँ के मंत्र का जाप करें:
“ॐ देवी महागौर्यै नमः”
- माँ के मंत्र का जाप करें:
-
- दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
-
- अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
कन्या पूजन का महत्व
-
- 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है।
-
- उन्हें भोजन (पूरी, चने, हलवा) कराया जाता है।
-
- उपहार और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया जाता है।
माँ महागौरी को प्रिय भोग
-
- नारियल
-
- खीर
-
- सफेद मिठाई (जैसे पेड़ा, बर्फी)
विशेष फल
जो भक्त सच्चे मन से माँ महागौरी की पूजा करते हैं, उन्हें:
-
- सभी कष्टों से मुक्ति
-
- विवाह संबंधी बाधाओं का समाधान
-
- जीवन में सुख और सौभाग्य प्राप्त होता है
Post Views: 2

